रोजगार में अधिक लाभ हेतु कम्पनी बदलने के सन्दर्भ में - प्रथम भाग
उसका प्रश्न था - मुझे नीदरलैंड से जॉब का ऑफ़र आया है , क्या वो मेरे लिए लाभप्रद रहेगा ?
रोजगार में अधिक लाभ हेतु कम्पनी बदलने के सन्दर्भ में - दूसरे भाग में और अधिक जानेंगे
बेरोजगारी आज भारत की ही नही पूरे विश्व के सभी देशों
की समस्या है | जिनके पास रोजगार होता है वो ये चाहते हैं कि जीवन में इससे भी
बेहतर कुछ किया जा सकता है | कर्म ही सबसे महत्वपूर्ण है तो इसके लिए उन्हें अपने
कर्म में अच्छे प्रयास व कठोर मेहनत करके कुछ तो परिवर्तन करना ही पड़ेगा , कहते भी
हैं कि - " परिवर्तन ही प्रगतिशीलता की निशानी है | "
मेरा बेटा जो कि वर्तमान में एक अन्तरराष्ट्रीय
कम्पनी बैंगलोर ( कर्नाटक ) में सीनियर सॉफ्टवेयर इंजीनियर है जिसे अच्छा वेतन व
प्रमोशन , मान सम्मान आदि भी मिल रहा है लेकिन फिर भी कुछ और बेहतर करने की ललक ने
उसे दीवाना बना रखा है , हर समय कुछ नया सीखता ही रहता है - कुछ बेहतर करने के लिए
यानि "परिवर्तन" | उसे नीदरलैंड से भी एक जॉब के लिए ऑफर
मिल रही थी तो वह मुझसे ज्योतिषीय मार्गदर्शन चाह रहा था कि मै वहाँ जा पाउँगा या
नहीं ? जाऊंगा तो क्या मेरे लिए यह लाभप्रद रहेगा ? मेरे अनुभव रहे हैं कि आपके
चाहने से कभी कुछ नही होता आप सिर्फ कर्म कर सकते हैं फल देना ईश्वर के हाथ में
होता है उसने अपना कर्म किया जिसकी वजह से ऑफर तो मिल ही गया लेकिन वह नीदरलैंड जा
सकेगा या नहीं और वहाँ जाना उसके लिए लाभप्रद भी होगा या नही ? हम सिर्फ कर्म ही
कर सकते हैं फल तो परमात्मा को ही देने होते हैं | इसको ज्योतिष के माध्यम से भी
अच्छे से जाना जा सकता है |
उसका प्रश्न था - मुझे नीदरलैंड से जॉब का ऑफ़र आया है , क्या वो मेरे लिए लाभप्रद रहेगा ?
इस प्रश्न के उत्तर को जानने से पहले प्रश्न को गहराई
से समझना होगा फिर उन सभी का गहनता से अध्ययन करने के बाद ही परिणाम बताये जाये तो
सटीकता बढ़ जाती है | इस प्रश्न में कुछ छुपे हुए प्रश्न भी हैं जैसे क्या
प्रश्नकर्ता व नियोक्ता के बीच तालमेल (एग्रीमेंट) हो पायेगा ? जॉब मिल पायेगी ?
क्या वर्तमान घर व कार्यस्थल छूट जायेगा ? वीजा मिल पायेगा या नही ? विदेश यात्रा
हो पायेगी ? इच्छानुसार वेतन मिलेगा ? आदि आदि |
नियोक्ता ने मेरे बेटे का इंटरव्यू ले लिया था उनकी
तरफ से " हाँ " मिल चुकी थी अब जॉब करने या ना करने की स्वीकृति बेटे को
देनी थी इसलिए उसने मुझसे ज्योतिषीय मार्गदर्शन चाहा था , देखते है कि ईश्वर को
क्या मंजूर है ?
मेरे द्वारा दिया गया प्रश्न दिनांक 20 जुलाई 2018 को दोपहर 15-13-56 बजे बैंगलोर में देखा
गया जिसकी कुंडली /भावों /ग्रहों आदि का विवरण निम्नानुसार है -
* रूलिंग ग्रह :
लग्न --
मंगल शनि
राहू गुरु
चन्द्र --
बुध चन्द्र गुरु
राहू
वार स्वामी -- शुक्र
* वर्तमान दशा : राहू 8-4-2031 तक
* वर्तमान भुक्ति : शनि 20-3-2021 तक
* प्रश्नकर्ता का
प्रश्न जांचें :
चन्द्र खुद प्रथम भाव (धन/परिवार भाव से बारवें) में है उसकी एक राशि कर्क
ग्यारवें भाव (इच्छापूर्ति भाव) में है चन्द्रमा राहू के नक्षत्र में है व प्रथम
भाव का उप नक्षत्र भी राहू है | राहू स्वयं दसवें भाव (कार्यस्थल) में स्थित है |
राहू चन्द्र की राशि व वक्री शनि के नक्षत्र में है शनि का तीसरे भाव में स्थित होना व उसकी एक
राशि पांचवें भाव (नियोक्ता की इच्छापूर्ति) व दूसरी छठे भाव (नियोक्ता का व्यय
भाव ) में है | अर्थात हम कह सकते हैं कि प्रश्नकर्ता का प्रश्न सही है जिसकी
पुष्टि भी हो रही है |
* क्या मेरे बेटे का नियोक्ता से तालमेल
(एग्रीमेंट) हो जायेगा ? चाहे नियोक्ता की
तरफ से तो इंटरव्यू लेने के बाद " हाँ " हो चुकी है लेकिन इसके लिए
कुण्डली के तीसरे व नोवें भाव के उप नक्षत्र को देखना होगा दोनों का उप नक्षत्र
राहू है जो कि दसवें भाव में ही है , राहू चन्द्रमा की राशि में जो कि ग्यारवे भाव
में है लेकिन राहू वक्री शनि के नक्षत्र में स्थित है तथा तीसरे भाव में ही है
इसकी राशियाँ भी पांचवें व छठे भाव में है इतनी सकारात्मकता के बाद भी सिर्फ शनि
के वक्री होने के कारण नकारात्मकता में परिणाम बदल गये | अत : हम कह सकते है दोनों
का तालमेल (एग्रीमेंट) नही होगा | तीसरा भाव वीजा का भी है वह नहीं मिल पायेगा तथा
घर भी नही छूट पायेगा |
* छठे भाव (नौकरी) का
अध्ययन छठे भाव का उप नक्षत्र स्वामी
बुध है वह खुद ग्यारवे भाव में ही है तथा इसकी एक राशि भी दसवे भाव में है ये तो
सकारात्मक है परन्तु दूसरी राशि कन्या पहले भाव में अर्थात धन भाव से बारवे भाव
में है तथा बुध स्वयं अपने ही नक्षत्र में होने के कारण इसका उप नक्षत्र ही
नक्षत्र के परिणाम देगा जो वक्री शनि है इसने सारी सकारात्मकता को ही समाप्त कर
दिया |
* ग्यारवे भाव का
अध्ययन (इच्छापूर्ति) इसका उप नक्षत्र भी राहू है राहू का अध्ययन हम पूर्व में
कर चुके हैं | वक्री शनि के नक्षत्र में होने के कारण इच्छापूर्ति नही होने देगा |
* दशा / भुक्ति स्वामी
का अध्ययन राहू की दशा 2031 तक है राहू के वक्री शनि
के नक्षत्र में होने व भुक्ति स्वामी भी वक्री शनि होने के कारण नकारात्मकता
उत्पन्न हो गयी है |
इस प्रकार संक्षेप में
पूरे विश्लेषण को देखें तो बेटा नीदरलैंड वाली जॉब के लिए नहीं जा सकेगा | यह स्वीकार करना होगा प्रमुख कारण वेतन
(धन) व परिवार ही रहेगा चाहे वर्तमान वेतन से दुगना ही मिल रहा था क्योंकि छठे भाव
का उप नक्षत्र स्वामी का धन भाव से कोई सम्बन्ध भी नहीं बन पा रहा |
ज्योतिष का यह भी एक सकारात्मक उपयोग है जिससे इतना बेहतरीन मार्ग दर्शन
प्राप्त किया जा सकता है | कीमती समय व धन के नुकसान से बचा जा सकता है |
रोजगार में अधिक लाभ हेतु कम्पनी बदलने के सन्दर्भ में - दूसरे भाग में और अधिक जानेंगे