मंगलवार, 11 जून 2019

वेटिंग रेल यात्रा टिकिट का कन्फर्मेशन

मेरी पत्नी को जयपुर से इंदौर जाना था | जून माह में रेल की सभी सीटें फुल हो जाती हैं , तेज गर्मी के कारण रात्रि की ट्रेन में तो जगह मिलना ही संभव नही है - वो भी अचानक | तय किया गया कि कल सुबह 06 जून 2019 को रेलवे की साईट  द्वारा तत्काल टिकिट बुक करा लेंगे | दुसरे दिन 06 जून 2019 को साईट ओपन होते ही टिकिट बुक कराते कराते ही सभी सीटें / बर्थ फुल हो गयी व हमे तत्काल वेटिंग में आठवां नम्बर मिला -



अब दो स्थिती हैं वेटिंग की टिकिट कन्फर्म होगी या नही ? अन्यथा टिकिट कैन्सिल कराया जावे |
वेटिंग की टिकिट  07 जून 2019 को कन्फर्म होगी या नही ये जानने के लिए मैंने दिनांक 06 जून 2019 को ही एक प्रश्न सोचा कि - वेटिंग की टिकिट कन्फर्म होगी या नही ? तथा रेल से ही यात्रा के योग भी है या नही ? ( क्योंकि टिकिट कन्फर्म नही होता है तो बस से भी जाया जा सकता है )
इसको कृष्णमूर्ति ज्योतिष पद्दति से जानने के लिए दिनांक  06 जून 2019 को  11-56-35 बजे मैंने  एक कुंडली बनायी 

सप्तम भाव को लग्न बनाने के बाद बनी कुण्डली / ग्रहों की स्थिती -



मेरे प्रश्न की सार्थकता - 

मेरे द्वारा सोचा गया प्रश्न सही था या नही इसको जानने के लिए चन्द्रमा का अध्धयन करना चाहिए चन्द्रमा की राशि कर्क तृतीय भाव में ही है जो टिकिट का व यात्रा का भी भाव है चन्दमा गुरु के नक्षत्र में है गुरु की एक राशि मीन ग्यारवें भाव में ही है जो कि इच्छापूर्ति भाव है अर्थात सोचा गया प्रश्न सही ही है |

क्या टिकिट कन्फर्म होगी ? 

इसको जानने के लिए तृतीय भाव का उप नक्षत्र स्वामी को देखेंगे जो कि बुद्ध है बुद्ध राहू के नक्षत्र में है राहू अपने नक्षत्र स्वामी के भी परिणाम भी देता है जो कि यहाँ गुरु है उसकी एक राशि ग्यारवें भाव में (इच्छापूर्ति) है गुरु खुद भी बुद्ध के नक्षत्र में बैठा है अर्थात टिकिट कन्फर्म हो जाएगी |

विभिन्न दशाओं का अध्ययन -



दशाओं में  -- गुरु की महादशा में शुक्र की भुक्ति बुद्ध का अंतरा केतु का सूक्ष्मा चल रहा है तथा प्राण दशा में शुक्र की प्राण दशा 06 जून 2019 को शाम 06 - 45 बजे तक है फिर इसके बाद सूर्य की प्राण दशा 07 जून 2019 को सुबह 04 - 24 तक है इसके बाद चन्द्रमा ( टिकिट कन्फर्म के लिए सकारात्मक ग्रह ) की प्राण दशा चालू हो जाएगी इनमे से गुरु  व बुद्ध का अध्धयन हम पूर्व में कर चुके हैं शुक्र को देखें तो वो बारवें भाव में बैठ कर स्थान में बदलाव ( Change of environment ) को इंगित कर रहा है इसकी एक राशि छठे भाव में है जो कि जीत का भाव ( सकारात्मक ) ही है | अब केतु को देखें तो अपनी राशि व नक्षत्र के भी परिणाम देता है केतु गुरु की राशि व शुक्र के नक्षत्र में है जो की टिकिट कन्फर्म के लिए सकारात्मक ग्रह ही हैं अब प्राण दशा स्वामी चन्दमा को देखें तो वो सुबह 04 - 24 से शाम 08 - 30 तक है इसी दौरान उपयुक्त लग्न में टिकिट कन्फर्म हो जाएगी | शाम  08 - 30 के बाद मंगल की प्राण दशा भी रेल यात्रा के उपयुक्त संकेत दे रही है |

सभी सकारात्मक स्थितीयों के आधार पर टिकिट कन्फर्मेशन व सफल यात्रा हो जाएगी इस बाबत  मैंने अपने बेटे को मेल से सूचित कर दिया देखें -



Confirmed Ticket

और अंत में -

1) यह ज्योतिष का एक और सकारात्मक उपयोग है | इससे समय व धन की बचत की जा सकती है तथा मानसिक शांति भी मिलती है |
2) भारतीय रेल को सुखद व सफल यात्रा करवाने के लिए धन्यवाद |  

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शनिवार, 23 फ़रवरी 2019

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ज्योतिष

News Reference: India Today

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग मौत का अनुमान लगाने में किया जाएगा, ऐसा सुनने में अजीब जरूर लग सकता है. लेकिन रिसर्चर्स एक ऐसी टेक्नोलॉजी को स्थाई रूप देने की कोशिश में लगे हैं, जो किसी मरीज के निकट भविष्य में मौत के जोखिम को लेकर डॉक्टर को अलर्ट दे सकता है. इससे डॉक्टर्स मरीज और उनके रिश्तेदारों से संपर्क कर सही तरीके जिंदगी खत्म करने को लेकर विचार कर सकते हैं | 

ये प्रयास स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के एक टीम ने किया है. रिसर्चर्स ने डीप लर्निंग नाम के मशीन लर्निंग तकनीक का इस्तेमाल किया. जो फिल्टर करने के लिए न्यूरल नेटवर्क का उपयोग करता है और ढेर सारे डेटा से लर्न करता है | 

ऐसे काम करती है मशीन:

इस मॉडल को तैयार करने के बाद रिसर्चर्स के टीम ने अस्पताल में भर्ती 20 लाख लोगों का इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड्स का डेटा उठाया और डीप लर्निंग एलगोरिदम को डेटा में फीड किया. इसके बाद AI ने अनुमान लगाया कि कौन सा मरीज 3 से लेकर 12 महीने में मौत को गले लगा सकता है स्टैनफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी के AI लैब में एक टीम मेंबर और पीएचडी कैंडिडेट ने आश्वासन दिया कि, 'हम एक सावधानीपूर्वक डिजाइन किए प्रयोगात्मक अध्ययन की जगह, स्वास्थ्य देखभाल की स्थापना के लिए नियमित रूप से कलेक्ट किए गए ऑपरेशनल डेटा का उपयोग कर एक प्रेडिक्टिव मॉडल बना सकते हैं | 
ये मॉडल इस बात का अच्छा सोर्स हो सकता है कि किस मरीज को जिंदगी खत्म होने से पहले अच्छे देखभाल की जरुरत है. साथ ही किस मरीज को जीवित रखने के लिए किस तरह के ट्रिटमेंट की जरुरत है | 

अब आप निम्न लिंक पर जाकर ज्योतिषीय आधार पर विश्लेषण पढ़ें  - 


मेरा यह लेख काफी संवेदनशील व रुला देने वाला है लेकिन एक शोध कार्य का हिस्सा है इसलिए इसका जिक्र करना भी बहुत आवश्यक हो जाता है | इस लेख की कुछ महत्वपूर्ण विशेषताएं हैं उन पर निम्नानुसार ध्यानाकर्षण चाहूँगा -

1) इस केस में दिनांक 16 - 12 - 2012 को वह दुर्घटना घटी जिसने पूरे देश को रुला दिया समाचार पत्रों से पता चलता था कि वह बार बार कोमा में चली जाती फिर जब होश आता तो अपनी माँ से कहती की माँ मै जीना चाहती हूँ कितनी बहादुर थी वो उसने घटना के समय भी संघर्ष किया गम्भीर हालातों में भी जीने की चाहत , मै बहुत ही भावुक व्यक्ति हूँ मुझसे नही रहा गया | वो सिर्फ एक माता - पिता की ही नहीं हम सभी की बेटी थी | ईश्वर से प्रार्थना करी और कुण्डली बना कर देखा कि भगवान उसकी जीने की चाहत पूरी करेंगे क्या ? 

२) कुण्डली में सबसे पहले ये देखना होता है कि जीवन है या मृत्यु और यदि जीवन पता चलता है तो ख़ुशी की बात है किन्तु मृत्यु पता चलती है तो ऐसे गम्भीर केस को देखकर तो कोई भी कह सकता है बच पाना मुश्किल है लेकिन ज्योतिषीय गणनाओं से वह दिनांक व समय भी जाना जा सकता है बशर्ते गणनाओं की जानकारी हो मैंने इस केस में 19 - 12 - 2012 को अर्थात तीन दिन बाद ही ईश्वर से प्रार्थना करते हुए यह जानना चाहा कि उसकी जीने की चाहत पूरी हो पायेगी ? ज्योतिषीय विश्लेषण में मृत्यु होने का पता लगा तथा मृत्यु दिनांक  29 - 12 - 2012 भी पता लग गयी थी किसी को भी यह नकारात्मक सन्देश नही बताया जा सकता था ,  देश ही नही पूरा विश्व ही अपराधियों के इस अमानवीय कृत्य के कारण से गुस्से में था | ईश्वर इच्छा ही थी , मानते हुए संतोष करना पड़ता है - पूरा वैज्ञानिक विश्लेषण इस लिंक के लेख में है जिसे मैंने अपने शोध कार्य के संकलन में सुरक्षित रख लिया था |

एक और उदाहरण भी देखें - दिनांक १ मई २०१५ को प्रकाशित समाचार पढ़ें जिसमे एक अस्वस्थ बच्चे को  एक दिन के लिए पुलिस कमिश्नर बनाया था देखें इस विडियो को -

News Reference: Dainik Jagran

News Reference: Dainik Bhaskar

मेरी  नजरों में पुलिस का यह एक बेहतरीन कार्य था मुझसे रहा नही गया | मैंने इस बच्चे की कुंडली बना कर विश्लेषण किया जिसे मैंने एक पत्र के द्वारा दिनांक 07 - 05 - 2015 को  जरिये स्पीड पोस्ट श्रीमान चिकित्सा  मंत्री , जे के लोन अस्पताल के अधीक्षक , तात्कालीन पुलिस कमिश्नर व पिंक सिटी प्रेस क्लब को प्रेषित किये थे | जिसमे पेज दो पर मैंने पुलिस के सम्मानजनक कार्य का आभार व्यक्त करते हुए निम्न बात लिखी थी - अवलोकन करें -



पेज - 2 पर 
बहुत ही कठिन होता है दुःख भरा ऐसा बताया जाना या लिखना अथवा हमारा देखना भी |

परिणाम -         04 -05-2016

News Reference: Dainik Bhaskar / Rajasthan Patrika

ईश्वर की इच्छा के आगे सभी हार जाते हैं , क्या कर सकते हैं ? परम पिता परमेश्वर उसकी आत्मा को शांति प्रदान करें | इस तरह के ज्योतिषीय विश्लेषणों से डर भी लगता है लेकिन कुछ सकारात्मक संदेश भी प्राप्त होते हैं जैसे श्रीमती सोनाली बेंद्रे अभिनेत्री के स्वस्थ होकर वापस अपने घर भारत में आने की कुण्डली का अध्ययन किया था | किसी को खुशियाँ दे सके इस भावना से देखना भी एवं शोध कार्य करने के उद्देश्य से उचित मानते हुए ही विश्लेषण करने का मन करता है | इस तरह के उदाहरणों का मेरे पास एक अच्छा संकलन हो रहा है जिसे बाद में अपने शोध कार्य के रूप में प्रकाशित करूँगा |

अपील-

यदि हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं ज्योतिष  का तुलनात्मक रूप से अध्ययन करे तो दोनों एक दूसरे के पूरक प्रतीत होते हैं | दोनों आपस में एक दूसरे का सहयोग लेते हुए शोध कार्य करें तो जनहित में बहुत बेहतरीन उपलब्धि प्राप्त की जा सकती है अत: हमारी अपील है कि हमारे वैज्ञानिकों एवं सरकार को हजारो वर्ष पुरानी ज्योतिष विज्ञान के प्रति नफरत दूर करें एवं अन्धविश्वास ना बताते हुए एक दूसरे का सम्मान के साथ  निरंतर शोध कार्यो की ओर अग्रसर होकर लाभ उठाना  चाहिये |

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गुरुवार, 8 नवंबर 2018

कौन असुर है व कौन देवता | फैसला करेगी देश की जनता ||

अस्वीकरण : मेरा यह लेख किसी भी राजनीतिक दल के पक्ष या विपक्ष में नहीं है | इसका किसी व्यक्ति विशेष , जाति , धर्म , सम्प्रदाय , आदि से कोई सम्बन्ध नही है तथा किसी की भी भावनाओं को किसी भी तरह से ठेस पंहुचाना हमारा उद्देश्य नहीं है | किसी भी शुभ कार्य में उपयुक्त समय का अपना महत्व होता है इस प्रकार के समय को ज्योतिष विज्ञान में शुभ मुहूर्त की संज्ञा दी गयी है | राहुकाल में भी शुभ कार्यों को टाल दिया जाना चाहिए उसी सन्दर्भ में ये जनता से जुडा एक और प्रकरण विचार करने के लिए प्रस्तुति मात्र है मेरे पास तो इसके सैकड़ो उदाहरण है , लेकिन खुद सीखें - खुद जानें के मकसद से आपके स्वयं के अनुभव के लिए  लेख प्रस्तुत है -       

"राहुकाल" - असुरों व देवताओं के समुद्र मंथन के दौरान निकले अमृत कलश से अमृत पीने के लिए दोनों में झगड़े होने लगे तब भगवान् विष्णु ने बीच में पड़कर देवताओं को अमृत व् असुरों को सोमरस पिलाना चाहा परन्तु एक असुर ने ये देख लिया था वह असुरों की तरफ से उठकर भेष बदलकर देवताओं की तरफ आ बैठा तथा धोखे से अमृत पी लिया लेकिन वह पकड में आगया था उसके बाद भगवान् विष्णु ने अपने चक्र से उसके दो टुकड़े कर दिए ऊपर का हिस्सा राहु व नीचे का केतु कहलाया तो राहुकाल वह समय है जिसमे अमृत मिलना तो देवताओं को था लेकिन असुर को भी मिल गया | इस समय किये गए शुभ कार्य या तो पूरे नहीं होते या व्यवधान आते हैं इसे टाल ही दिया जाना चाहिए | रोजाना के कार्य तो नियमित करें किन्तु शुभ कार्य को इस समय नहीं करने का अनुभव मैंने व मेरे पास पढने आने वालों ने सभी ने किया है , आप भी अनुभव कर साझा करें |

प्रतिदिन राहुकाल का समय कब से कब तक होता है यह जानने के लिए उस दिन का सूर्योदय व सूर्यास्त का समय नोट करें सूर्योदय से सूर्यास्त की अवधि को दिनमान एवं सूर्यास्त से सूर्योदय की अवधि को रात्रिमान कहते हैं | रात्रिमान की अवधि में राहुकाल नही होता है | अब दिनमान के आठ भाग करलें , उस अवधि में आठ का भाग देवें प्रत्येक भाग की अवधि निकल आएगी नोट करके रखलें | याद रखने के लिए निम्न लाइन को याद करलें -


X        Mother   Saw   Father   Wearing   The   Turban   on   Sunday
1     2             3          4               5                 6         7                        8

X दिनमान के पहले भाग में राहुकाल नही होता है
Mo = सोमवार ,  Sa = शनिवार ,   F = शुक्रवार ,  We = बुधवार ,
 Th = गुरुवार , Tu =  मंगलवार ,    Su = रविवार    को मानलें

अर्थात दिनमान के दूसरे भाग की अवधि में सोमवार को , तीसरे भाग की अवधि में शनिवार को , चोथे भाग की अवधि में शुक्रवार को , पांचवे भाग की अवधि में बुधवार को , छठे भाग की अवधि में गुरुवार को , सातवे भाग की अवधि में मंगलवार को , आठवे भाग की अवधि में रविवार को राहुकाल होता है | इसे निम्न उदाहरण से समझे -

मानलो सूर्योदय सुबह 6 बजे व सूर्यास्त शाम 6 बजे है तो दिनमान की अवधि 12 घंटे की हुई इसमे आठ का भाग दिया तो एक भाग की अवधि एक घंटा तीस मिनिट की हुई इसको सूर्योदय में जोड़ते हुए आठों भाग की अलग अलग अवधि जान लेंगें जैसे

पहला भाग सुबह 6 बजे ( सूर्योदय ) से 7 - 30 तक इस अवधि में भी राहुकाल नही होता है |
दसरा भाग सुबह 7 -30 से 9 बजे तक सोमवार को राहुकाल रहेगा |
तीसरा भाग सुबह 9 से 10 -30  तक शनिवार को राहुकाल रहेगा | 
चोथा भाग सुबह 10 - 30 से दोपहर 12 बजे तक शुक्रवार को राहुकाल रहेगा |
पांचवा भाग दोपहर 12 बजे से 1 -30 तक बुधवार को राहुकाल रहेगा |
छठा भाग दोपहर 1 -30 से 3 बजे तक गुरुवार को राहुकाल रहेगा |
सातवाँ भाग दोपहर 3 बजे से 4 - 30 तक मंगलवार को राहुकाल रहेगा |
आठवां भाग शाम 4 - 30 से 6 बजे ( सूर्यास्त ) तक रविवार को राहुकाल रहेगा |

ये एक उदाहरण है जबकि सूर्योदय सुबह 6 बजे व सूर्यास्त शाम 6 बजे हो रहा हो | अक्सर कई बार लोग गलती से उपरोक्त समयावधि को ही राहुकाल मान लेते है ये गलत है सर्दियों व गर्मियों में सूर्योदय व सूर्यास्त का समय अलग हो जाता है तो राहुकाल की अवधि में भी आंशिक परिवर्तन  होगा | ध्यान रखें |

समाचारों के माध्यम से पता चला था कि देहली में रविवार को शाम को 4 बजे "" सिग्नेचर ब्रिज "" का माननीय मुख्यमंत्री श्री अरविन्द केजरीवाल उद्घाटन करेंगे | इस समय को जानकर मुझे तुरंत ही राहुकाल याद आ गया , सोचा कि इस उद्घाटन समारोह में जरुर कुछ न कुछ अप्रिय घटेगा | बाद में पता चला कि उस इलाके के सांसद श्री मनोज तिवारी जी भी उद्घाटन के स्थल पर मौजूद रहेंगे | राहुकाल की अवधि ( लगभग शाम 4 -15 से 5 - 45 तक ) भी इस दौरान रहेगी मुझे अरुचिकर सा लगने लगा कि उस स्थल पर किसी प्रकार की कोई अप्रिय घटना न घट जाये | दो अलग अलग विचारधारा  के लोग वंहा रहेंगे | ये दोनों दलों में ही आपस में छत्तीस का आंकड़ा है , राहुकाल अपना कार्य अवश्य करेगा |

( सिग्नेचर ब्रिज )
उद्घाटन समारोह के दौरान क्या क्या घटनाएँ घटी इसे आप इन्टरनेट के द्वारा मेन स्ट्रीम मीडिया / सोशल मीडिया के माध्यम से जाने , चूँकि मै किसी भी राजनीतिक दल से जुडा हुआ नही हूँ इसलिए इस विषय पर कोई टिप्पणी उचित नही मानता आप तो "राहुकाल" को जाने और अपने जीवन में इस  समय में किये गये शुभ कार्यों का अनुभव लेते हुए अपने अनुभवों को जनहितार्थ साझा करें |
राहुकाल को जानने / अनुभव के लिए मेरे पूर्व आर्टिकल को निम्न लिंक पर भी पढ़ सकते है -

राहुकाल में चुनाव आयोग का ई.वी.एम चैलेंज -

 


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शनिवार, 4 अगस्त 2018

परिवर्तन और प्रगतिशीलता

रोजगार में अधिक लाभ हेतु कम्पनी बदलने के सन्दर्भ में -                            प्रथम भाग 


बेरोजगारी आज भारत की ही नही पूरे विश्व के सभी देशों की समस्या है | जिनके पास रोजगार होता है वो ये चाहते हैं कि जीवन में इससे भी बेहतर कुछ किया जा सकता है | कर्म ही सबसे महत्वपूर्ण है तो इसके लिए उन्हें अपने कर्म में अच्छे प्रयास व कठोर मेहनत करके कुछ तो परिवर्तन करना ही पड़ेगा , कहते भी हैं कि - " परिवर्तन ही प्रगतिशीलता की निशानी है | "

मेरा बेटा जो कि वर्तमान में एक अन्तरराष्ट्रीय कम्पनी बैंगलोर ( कर्नाटक ) में सीनियर सॉफ्टवेयर इंजीनियर है जिसे अच्छा वेतन व प्रमोशन , मान सम्मान आदि भी मिल रहा है लेकिन फिर भी कुछ और बेहतर करने की ललक ने उसे दीवाना बना रखा है , हर समय कुछ नया सीखता ही रहता है - कुछ बेहतर करने के लिए यानि "परिवर्तन" | उसे नीदरलैंड से भी एक जॉब के लिए ऑफर मिल रही थी तो वह मुझसे ज्योतिषीय मार्गदर्शन चाह रहा था कि मै वहाँ जा पाउँगा या नहीं ? जाऊंगा तो क्या मेरे लिए यह लाभप्रद रहेगा ? मेरे अनुभव रहे हैं कि आपके चाहने से कभी कुछ नही होता आप सिर्फ कर्म कर सकते हैं फल देना ईश्वर के हाथ में होता है उसने अपना कर्म किया जिसकी वजह से ऑफर तो मिल ही गया लेकिन वह नीदरलैंड जा सकेगा या नहीं और वहाँ जाना उसके लिए लाभप्रद भी होगा या नही ? हम सिर्फ कर्म ही कर सकते हैं फल तो परमात्मा को ही देने होते हैं | इसको ज्योतिष के माध्यम से भी अच्छे से जाना जा सकता है |

उसका प्रश्न था - मुझे नीदरलैंड से जॉब का ऑफ़र आया है , क्या वो मेरे लिए लाभप्रद रहेगा ?




इस प्रश्न के उत्तर को जानने से पहले प्रश्न को गहराई से समझना होगा फिर उन सभी का गहनता से अध्ययन करने के बाद ही परिणाम बताये जाये तो सटीकता बढ़ जाती है | इस प्रश्न में कुछ छुपे हुए प्रश्न भी हैं जैसे क्या प्रश्नकर्ता व नियोक्ता के बीच तालमेल (एग्रीमेंट) हो पायेगा ? जॉब मिल पायेगी ? क्या वर्तमान घर व कार्यस्थल छूट जायेगा ? वीजा मिल पायेगा या नही ? विदेश यात्रा हो पायेगी ? इच्छानुसार वेतन मिलेगा ? आदि आदि |

नियोक्ता ने मेरे बेटे का इंटरव्यू ले लिया था उनकी तरफ से " हाँ " मिल चुकी थी अब जॉब करने या ना करने की स्वीकृति बेटे को देनी थी इसलिए उसने मुझसे ज्योतिषीय मार्गदर्शन चाहा था , देखते है कि ईश्वर को क्या मंजूर है ?

मेरे द्वारा दिया गया प्रश्न दिनांक 20 जुलाई 2018 को दोपहर 15-13-56 बजे बैंगलोर में देखा गया जिसकी कुंडली /भावों /ग्रहों आदि का विवरण निम्नानुसार है -          




* रूलिंग ग्रह :
            लग्न --    मंगल        शनि          राहू           गुरु      
            चन्द्र --     बुध         चन्द्र          गुरु           राहू
            वार स्वामी -- शुक्र
* वर्तमान दशा :   राहू  8-4-2031 तक
* वर्तमान भुक्ति : शनि 20-3-2021 तक


* प्रश्नकर्ता का प्रश्न जांचें :
चन्द्र खुद प्रथम भाव (धन/परिवार भाव से बारवें) में है उसकी एक राशि कर्क ग्यारवें भाव (इच्छापूर्ति भाव) में है चन्द्रमा राहू के नक्षत्र में है व प्रथम भाव का उप नक्षत्र भी राहू है | राहू स्वयं दसवें भाव (कार्यस्थल) में स्थित है | राहू चन्द्र की राशि व वक्री शनि के नक्षत्र में है शनि का तीसरे भाव में स्थित होना व उसकी एक राशि पांचवें भाव (नियोक्ता की इच्छापूर्ति) व दूसरी छठे भाव (नियोक्ता का व्यय भाव ) में है | अर्थात हम कह सकते हैं कि प्रश्नकर्ता का प्रश्न सही है जिसकी पुष्टि भी हो रही है |


* क्या मेरे बेटे का नियोक्ता से तालमेल (एग्रीमेंट) हो जायेगा ? चाहे नियोक्ता की तरफ से तो इंटरव्यू लेने के बाद " हाँ " हो चुकी है लेकिन इसके लिए कुण्डली के तीसरे व नोवें भाव के उप नक्षत्र को देखना होगा दोनों का उप नक्षत्र राहू है जो कि दसवें भाव में ही है , राहू चन्द्रमा की राशि में जो कि ग्यारवे भाव में है लेकिन राहू वक्री शनि के नक्षत्र में स्थित है तथा तीसरे भाव में ही है इसकी राशियाँ भी पांचवें व छठे भाव में है इतनी सकारात्मकता के बाद भी सिर्फ शनि के वक्री होने के कारण नकारात्मकता में परिणाम बदल गये | अत : हम कह सकते है दोनों का तालमेल (एग्रीमेंट) नही होगा | तीसरा भाव वीजा का भी है वह नहीं मिल पायेगा तथा घर भी नही छूट पायेगा | 

* छठे भाव (नौकरी) का अध्ययन  छठे भाव का उप नक्षत्र स्वामी बुध है वह खुद ग्यारवे भाव में ही है तथा इसकी एक राशि भी दसवे भाव में है ये तो सकारात्मक है परन्तु दूसरी राशि कन्या पहले भाव में अर्थात धन भाव से बारवे भाव में है तथा बुध स्वयं अपने ही नक्षत्र में होने के कारण इसका उप नक्षत्र ही नक्षत्र के परिणाम देगा जो वक्री शनि है इसने सारी सकारात्मकता को ही समाप्त कर दिया |

* ग्यारवे भाव का अध्ययन (इच्छापूर्ति) इसका उप नक्षत्र भी राहू है राहू का अध्ययन हम पूर्व में कर चुके हैं | वक्री शनि के नक्षत्र में होने के कारण इच्छापूर्ति नही होने देगा |

* दशा / भुक्ति स्वामी का अध्ययन राहू की दशा 2031 तक है राहू के वक्री शनि के नक्षत्र में होने व भुक्ति स्वामी भी वक्री शनि होने के कारण नकारात्मकता उत्पन्न हो गयी है |

इस प्रकार संक्षेप में पूरे विश्लेषण को देखें तो बेटा नीदरलैंड वाली जॉब के लिए नहीं जा  सकेगा | यह स्वीकार करना होगा प्रमुख कारण वेतन (धन) व परिवार ही रहेगा चाहे वर्तमान वेतन से दुगना ही मिल रहा था क्योंकि छठे भाव का उप नक्षत्र स्वामी का धन भाव से कोई सम्बन्ध भी नहीं बन पा रहा |

ज्योतिष का यह भी एक सकारात्मक उपयोग है जिससे इतना बेहतरीन मार्ग दर्शन प्राप्त किया जा सकता है | कीमती समय व धन के नुकसान से बचा जा सकता है |

रोजगार में अधिक लाभ हेतु कम्पनी बदलने के सन्दर्भ में -           दूसरे भाग में और अधिक जानेंगे 

बुधवार, 14 जून 2017

चुनाव आयोग का ई.वी.एम चैलेंज

अस्वीकरण: यह लेख केंद्र / राज्य सरकार , चुनाव आयोग , न्यायालय अथवा किसी भी राजनीतिक दलों के कार्य मे हस्तक्षेप नही है व ना ही उनकी मान प्रतिष्ठा को  क्षति पहुचाने के लिए है | फिर भी यदि किसी को भी आर्थिक अथवा मानसिक क्षति पहुँचती है तो लेखक इसके लिए जिम्मेदार नही है | यह लेख केवल ज्योतिष का वैज्ञानिक तरह से विश्लेषण कर ज्योतिष का अध्ययन करने वालों के उपयोग के लिए शोधपूर्ण प्रस्तुति है | 

भारतीय लोकतंत्र का पूरे विश्व में बहुत सम्मान रहा है, लेकिन गत कुछ वर्षों से हमारे भारतीय लोकतंत्र को ना जाने किसकी नज़र लग गयी हैकिसी भी देश के लोकतंत्र का चुनाव आयोग ही ताज होता है| लोकतंत्र की प्रतिष्ठा का रास्ता यही से प्रारम्भ होता है| लोकतंत्र की परिभाषा - " जनता द्वारा जनता के लिए जनता का शासन " कही जाती है| अंग्रेजी मे इसे डेमोक्रेसी कहा गया है जिसकी उत्पत्ति ग्रीक शब्द "डेमोस" से हुई है जिसका मतलब "जनसाधारण" है| इसमे "केसी" शब्द और जोड़ा गया जिसका मतलब "शासन या सरकार" है| इसलिए लोकतंत्र कि प्रमुख चाबी जनता के हाथों मे ही है|

भारतीय लोकतंत्र को पूरे विश्व मे सम्मान की नजरो से देखा जाता है| ये सब भारत की जनता की एकता व अखंडता की वजह से संभव हो सका है| जनता अपने वोट देने के अधिकार को समझने लगी है| वोट देकर सरकार चुनने का काम तो जनता द्वारा ही किया जाता है लेकिन इस कार्य को निष्पक्षता से कराने की पूर्ण जिम्मेदारी चुनाव आयोग को दी गयी है इसलिए कहा जा सकता है कि लोकतंत्र की रक्षा का प्रमुख दायित्व चुनाव आयोग पर ही है| पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त श्री टी एन शेषन के कार्यकाल को लोकतंत्र के इतिहास मे भुलाया नही जा सकता| भारतीय लोकतंत्र को पूरे विश्व में सर्वोच्च शिखर पर पहुचाने का इनके द्वारा किया गया कार्य जो कि स्वर्णाक्षरो मे ही लिखे जाने योग्य है|

"चुनाव आयोग" हमारे देश की स्वतंत्र सर्वोच्च संवैधानिक संस्था है| इसकी मान प्रतिष्ठा हम सभी की मान प्रतिष्ठा है, इसे नाकारा नही जा सकता| निष्पक्ष चुनाव कराना इस आयोग का दायित्व है| पूर्व मे जब चुनाव बैलेट पेपर से कराये जाते थे तो बहुत कागज लगता था तथा चुनाव बहुत महँगे हो जाते थे , परिणामों की घोषणा मे भी कई कई दिन लग जाते थे , बूथों पर कब्जे भी हो जाते थे| इन सब कारणों से चुनाव बहुत महँगे पड़ते थे| जिसका सारा भार जनता पर ही आता था| इससे मुक्ति के लिए एवं आधुनिकीकरण के इस दौर में "बैलेट पेपर" कि बजाये "ई वी एम" से चुनाव कराना तय किया गया|




विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा ई वी एम मशीन से निष्पक्षता से चुनाव कराये जाने को लेकर संदेह व्यक्त किया जाने लगा विद्वान लोग न्यायालय भी गए| चुनाव आयोग पर भी प्रश्न चिन्ह लगने लगे| चुनाव आयोग ने अपनी ई वी एम मशीन को दुनिया की सर्वोत्तम मशीन बताने के अपने तर्क भी दिए| लेकिन राजनीतिक दलों ने उन्हें स्वीकार नही किया तब चुनाव आयोग ने ई वी एम मशीन से वोट ट्रान्सफर होने के संदेह को दूर करने के लिए  दिनांक ३ जून 2017 को एक "चैलेन्ज" का आयोजन किया, जिसमे केवल दो राजनीतिक दलों ने ही हिस्सा लेना तय किया|

चुनाव आयोग ने दिनांक 3 जून 2017 को उक्त "चैलेन्ज" का समय प्रातः 10 बजे का रखा|

उस दिन शनिवार था और मुझे जैसे ही "चैलेन्ज" प्रारम्भ का समय प्रातः 10 बजे का पता लगा, एक अजीब सी शंका ने मन को विचलित कर दिया| बहुत ही महत्वपूर्ण कार्य का प्रारम्भ था| ये सीधे रूप मे देखें तो ये सर्वोच्च संवैधानिक संस्था चुनाव आयोग द्वारा ई वी एम पर उठ रहे सवालों को दूर कर पूरे विश्व मे हमारे भारतीय लोकतंत्र की मान प्रतिष्ठा को बचाने जैसा अत्यधिक महत्वपूर्ण कार्य था| लेकिन शनिवार को प्रातः 10 बजे प्रारम्भ का मतलब उक्त कार्य को "राहुकाल" मे प्रारम्भ करना था|

मेरे यहाँ पढने आने वालो को मै "राहुकाल" के बारे मे जानकारी जरुर दिया करता हूँ क्योंकि उत्तरी भारत मे बहुत कम लोग इसके महत्व को जानते हैं| पुरातन जानकारी के अनुसार ऐसा कहा जाता है कि राक्षसों व देवताओं के द्वारा किये गए समुद्र मंथन के दौरान निकले अमृत कलश से अमृत को जब भगवान् विष्णु भेष बदल कर देवताओं को अमृत पिला रहे थे तो एक राक्षस ने भगवान् विष्णु की  इस चालाकी को समझ गया| उसने देवताओं का भेष बना के भगवान् विष्णु के हाथों अमृत पी लिया तो "राहुकाल" इसी समय को माना जाता है कि जो अमृत मिलना तो था देवताओं को लेकिन राक्षस को भी मिल गया| इसे यूँ भी कह सकते है कि " होना कुछ होता है जबकि हो कुछ और ही जाता है"| इसका मैंने सैकड़ों बार अनुभव लिया है कोई भी नया शुभ कार्य "राहुकाल" में करके आप भी अनुभव लेवें|

तो "राहुकाल" मे चैलेन्ज का प्रारम्भ होना इस बात का संकेत दे रहा था कि इस पूरी प्रक्रिया मे "किसी को भी लाभ नहीं मिलने वाला, करना कुछ चाहेंगे हो कुछ और ही जायेगा"| कोई नतीजा नही निकलेगा इस आयोजन का , मुझे बहुत दुःख हो रहा था जब मेरे सब्र कि सीमा टूट गयी तो मैंने एकाग्रता बनाके प्रश्न सोचा कि "आज इस ई वी एम चैलेन्ज में कौन जीतेगा या क्या अधुरा रह जायेगा ये आयोजन ?" हालाँकि न तो चुनाव आयोग व ना ही राजनीतिक दल इसे हार - जीत मान रहे थे केवल इस समस्या को दूर करने का प्रयास मान रहे थे लेकिन मेरी नज़रों मे "चैलेन्ज" शब्द में  हार - जीत भी समाहित है अथवा पूरा मामला अनिर्णीत रह जायेगा जैसे की क्रिकेट के मैच मे ड्रा हो जाता है| इसलिए मैंने ऐसा प्रश्न किया और उसकी कुंडली बनायी| एक तो "राहुकाल" से भी अनिर्णय का एहसास हुआ, इसी को अब निम्न कुंडली मे भी देखते हैं -

कुंडली देखने की दिनांक 03 जून 2017 समय 12-45-38 दोपहर
स्थान: जयपुर 75 पू 42 , 2656


प्रश्नकर्ता की कुण्डली
ग्रहों एवं भावों की स्थिति




प्रश्न को कुंडली मे जांचे -
चन्द्रमा 11वे भाव इच्छापूर्ति भाव मे बैठा है इसकी एक राशि 10वे भाव में  है| दसवा भाव मान प्रतिष्ठा का भाव है| ये भाव सरकार का भी होता है किसी भी तरीके से मान प्रतिष्ठा बनी रह जाये इसी मेरी इच्छा बताता है| चन्द्रमा सूर्य के नक्षत्र मे है| सूर्य खुद 8वे भाव मे है जो मुझे होने वाले दुःख को भी बता रहा है| इसकी एक राशि 11वे भाव मे होने के कारण मेरी इच्छा को भी स्पष्ट कर रहा है|

मैंने 9वे भाव को चुनाव आयोग की लग्न के लिए चुना है तथा इसके ठीक सामने 3सरे भाव को राजनीतिक दलों की लग्न के लिए माना है| कुंडली को घुमाकर इनकी लग्न बना के देखने पर भी प्रश्न की जांच सही मिलती है| अतः हम कह सकते है की कुंडली सही बनी है|

यदि हम सिर्फ दशाओं को भी देखे तो भी हमे उत्तर मिल जाता है सूर्य दशा मे केतु की भुक्ति मे राहु की अन्तरा मे मंगल की सूक्ष्मा है| सभी अनिर्णय की ही जानकारी दे रहे है| चुनाव आयोग व राजनीतिक दलों की कुंडली 3सरे, 6ठे भाव  व 11वे भाव के अध्ययन से शेष जानकारी मिल रही है|

चुनाव आयोग की कुंडली के 6ठे भाव का उप नक्षत्र स्वामी सूर्य है जो की चन्द्रमा के नक्षत्र मे है जबकि राजनीतिक दलों कि कुंडली के 6ठे  भाव का उप नक्षत्र स्वामी चन्द्रमा है जो की सूर्य के नक्षत्र मे है| दोनों को कुंडली मे अध्ययन करने पर साफ़ पता चलता है कि इस चैलेन्ज मे किसी को भी कोई लाभ नही मिलने वाला|

परिणाम :
चूँकि मामला न्यायालय के अधीन भी चल रहा है इसलिए विश्लेषण को स्पष्ट नहीं लिखा जा सकता, लेकिन उस दिन के चैलेन्ज के परिणाम की जानकारी मिल जाती है| जिसे बाद मे चुनाव आयोग ने खुद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस मे स्पष्ट किया|

पुष्टि :
चुनाव आयोग द्वारा की गई - प्रेस कॉन्फ्रेंस स्वयं देखें -


न्यूज़ रेफ्रेंस : डी. डी. न्यूज़ 

विशेष निवेदन :
अंत में मै हमारी केंद्र सरकार एवं राज्य सरकारें , चुनाव आयोग व  बिभिन्न राजनीतिक दलों से एक ही प्रार्थना करूँगा की दुनिया मे हमारे देश की जो लोकतंत्र के प्रति मान प्रतिष्ठा है उसे बनाये रखेंगें एवं देशहित मे भी जितना जल्दी हो सके इस प्रकरण का निपटारा करायेंगे| 

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